हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान की हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख़ नईम क़ासिम ने 2006 के 33 दिवसीय युद्ध में प्रतिरोध की सफलता को इज़राइल के ख़िलाफ़ शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा है कि प्रतिरोध आज भी अपने फ़ैसलों पर क़ायम है और जो लोग हमारे हथियार डालने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वे ख़ामख़याली में हैं।
शेख़ नईम क़ासिम ने 33 दिवसीय युद्ध की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि जुलाई 2006 के युद्ध ने साबित कर दिया कि प्रतिरोध परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखता है। उनके अनुसार, इस युद्ध में इज़राइल और अमेरिका को लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध, जनता और सेना के गठबंधन का सामना करना पड़ा और अंततः इज़राइली योजना विफल हो गई।
उन्होंने कहा कि 2006 से लेकर 2023 तक इज़राइल पर प्रतिरोध के प्रभाव बरक़रार रहे, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रतिरोध प्रभावी शक्ति रखता है।
मौजूदा परिस्थितियों के बारे में हिज़्बुल्लाह के प्रमुख ने कहा कि अक्टूबर 2024 का समझौता अब भी लागू है और उसका मुख्य उद्देश्य इज़राइली सेना की वापसी है। उन्होंने लेबनानी अधिकारियों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें प्रतिरोध के हथियारों के अलावा कोई और समस्या दिखाई नहीं देती, जबकि इज़राइली कब्ज़े और आक्रामकता के ख़िलाफ़ प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।
शेख़ नईम क़ासिम ने तथाकथित "फ़्रेमवर्क समझौते" पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि बातचीत में इज़राइल और अमेरिका का रुख़ एक ही है, जबकि लेबनान को अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने दक्षिणी लेबनान से विस्थापित लोगों की सहायता, उन्हें आश्रय उपलब्ध कराने और नुक़सान की भरपाई को सरकार की ज़िम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह जनता की सहायता जारी रखेगी।
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने शहीदों और घायलों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी क़ुर्बानियाँ व्यर्थ नहीं जाएँगी। उन्होंने क़ैदियों की रिहाई के लिए प्रयास जारी रखने का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि कठिनाइयों के बावजूद प्रतिरोध अपना संघर्ष जारी रखेगा और आने वाले दिनों में सफलता के चरण सामने आएँगे।
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